“माता श्री ललिता सहस्रनाम स्तोत्रम्” का 398वाँ दिव्य नाम है “अव्यक्त”
दिव्य माता, जोसमस्त सृजित से परे हैं,फिर भी नित्य जुड़ी हैंसमस्त सृजित से।