✦ ॐ माँ त्रिपुर सुंदरीर जय ✦
“माँ श्री ललितात्रिपुर सुंदरी मन्दिर” MahaVidya.Academyपाठ करना सीखेंस्वयंसेवक बनें

माँ श्री ललिता सहस्रनाम स्तोत्रम् का दिव्य नाम 298 है “नारायणी”

माँ नारायणी वह दिव्य माता हैं, जो भगवान विष्णु का परम आधार हैं। इस दिव्य नाम की एक व्याख्या है: “नारन्” का अर्थ है “आत्मा”। और जो कुछ उत्पन्न होता है, वह सब आत्मा के प्रतिबिम्ब {अयन} हैं।

अतः “नर+अयन” ही नारायण है: माँ नारायणी के दिव्य आशीर्वाद से सृजित सभी रूपों का धाम, जो आत्मा {नर} के द्वारा रूपों को आत्मा के प्रतिबिम्ब {अयन} के रूप में गढ़ती हैं।

आत्मा रूप का मूल तत्त्व है, और

“माता नारायणी” नारायण का स्रोत और ऊर्जा अथवा आश्रय हैं: वह, जो सभी रूपों को अस्तित्व में रहने का आशीर्वाद देती हैं।

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