स्थान
- पता: चवडिनाडा, वेंगनूर, तिरुवनन्तपुरम, केरल, भारत
- निकटता:
- कोवलम से लगभग 5 किमी
- विझिंजम बन्दरगाह से लगभग 2.1 किमी
- श्री पद्मनाभस्वामी मन्दिर से लगभग 15 किमी
- तिरुवनन्तपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से लगभग 17 किमी
- तिरुवनन्तपुरम सेंट्रल रेलवे स्टेशन से लगभग 15 किमी
आराध्य देवी और महत्त्व
मन्दिर की प्रधान आराध्य देवी हैं श्री बाला माँ त्रिपुर सुंदरी देवी, जो पडकालियम्मा के नाम से भी पूजित हैं, प्राचीन आय राजवंश की दिव्य रक्षिका। दिव्य माता की उपासना काली के पाँच उग्र रूपों में की जाती है: बाल भद्र, वीर भद्र, रौद्र भद्र, क्रोध भद्र और संहार भद्र। भक्त रोग-निवारण, मनोकामनाओं की पूर्ति और विविध समस्याओं के समाधान हेतु दिव्य आशीर्वाद की कामना करते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मन्दिर का उद्गम आय राजवंश से जुड़ा है, जिसने विझिंजम के आसपास के क्षेत्र पर शासन किया। पौर्णमिकावु देवी उनकी दिव्य रक्षिका थीं, जिनकी कृपा से राजवंश की रक्षा हुई और उसकी समृद्धि बढ़ी। आक्रमणों से विग्रह की रक्षा हेतु आय राजाओं ने विग्रह को चवडिनाडा, वेंगनूर के एक वन-क्षेत्र में स्थानांतरित किया। समय के साथ, उपेक्षा के कारण राजवंश का पतन हो गया। 2009 में, ब्रह्मश्री पूंजार मित्रन नम्बूतिरिपाद के मार्गदर्शन में मन्दिर का पुनरुद्धार किया गया, दिव्य माता की उपासना पुनः स्थापित हुई और मन्दिर की प्रतिष्ठा लौट आई।
विशिष्ट विशेषताएँ
- अक्षर देवता उपासना: यह मन्दिर सभी 51 अक्षर देवताओं (वर्णमाला देवियों) की प्रतिष्ठा और उपासना के लिए प्रसिद्ध है, एक अनूठी परम्परा जो ज्ञान और विद्या के साथ दिव्य माता के सम्बन्ध की प्रतीक है।
- उप-देवता: लगभग 25 उप-देवताओं की उपासना मन्दिर परिसर में होती है, जो मन्दिर की समावेशी आध्यात्मिक परम्पराओं को दर्शाती है।
- स्थापत्य की विशेषताएँ:
- यहाँ विराजमान है सबसे बड़ा पंचमुख (पाँच मुखों वाला) गणेश विग्रह , जो एक ही शिला से निर्मित है और 200 सेमी ऊँचा है।
- यहाँ स्थित है सबसे बड़ा नागराज विग्रह , जो एक ही शिला में निर्मित है और जिसकी ऊँचाई 275 सेमी है।
- यहाँ स्थापित पौर्णमिकावु देवी का विग्रह विश्व का सबसे बड़ा पंचलोह (पाँच धातुओं का) विग्रह है, जो 6.5 फुट ऊँचा है और जिसका भार 1300 किग्रा है।
उत्सव और अनुष्ठान
- मन्दिर खुलने के दिन: यह मन्दिर विशिष्ट रूप से केवल पौर्णमी (पूर्णिमा) के दिनों तथा कुछ विशेष अवसरों, जैसे नवाहम्, विद्यारम्भम् और अन्य उत्सवों पर ही खुलता है।
- प्रमुख अनुष्ठान:
- महा गणपति होमम्
- अक्षर देवता पूजा
- सरस्वती पूजा
- श्री चक्र पूजा
- चण्डिका होमम्
- सर्प दोष निवारण पूजा
- मृत्युंजय पूजा
- भक्तों की साधनाएँ: पौर्णमी के दिनों में भक्त ‘दीप प्रदक्षिणम्’ करते हैं, दिव्य माता को अर्पण स्वरूप घी के दीप लेकर मन्दिर की परिक्रमा करते हुए।
