“माता श्री ललिता सहस्रनाम स्तोत्रम्” का 399वाँ दिव्य नाम है “व्यक्त अव्यक्त स्वरूपिणी”
दिव्य माता, जो व्यक्त और अव्यक्त, दोनों ही रूपों में विद्यमान हैं। माँ जैसा चाहती हैं, जब चाहती हैं, वैसा ही संकल्प करती हैं।