स्थान
- नगर: दंतेवाड़ा
- जिला: दंतेवाड़ा
- राज्य: छत्तीसगढ़, भारत
- भौगोलिक स्थिति: पवित्र शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम पर स्थित यह मन्दिर जगदलपुर से लगभग 80 किमी की दूरी पर है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इसका निर्माण 14वीं शताब्दी में चालुक्य राजाओंद्वारा किया गया। माँ दंतेश्वरी मन्दिर पारम्परिक चालुक्य और द्रविड़ स्थापत्य शैलियों का संगम प्रस्तुत करता है। मन्दिर की सूक्ष्म नक्काशी और मूर्तियाँ विविध पौराणिक कथाओं को चित्रित करती हैं, जो इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, माता सती का एक दंत इसी स्थान पर गिरा था, जिससे यह एक महत्वपूर्ण शक्ति पीठ बना। “दंतेश्वरी” नाम “दाँत” शब्द से व्युत्पन्न है, जिसका अर्थ दंत है। यह मन्दिर शताब्दियों से श्रद्धा और भक्ति का केन्द्र रहा है, विशेष रूप से बस्तर के जनजातीय समुदायों में।
स्थापत्य विशेषताएँ
- गर्भगृह (पवित्रतम स्थल): इसमें षड्भुजा माँ महिषासुरमर्दिनी की काले पत्थर की प्रतिमा विराजमान है, जो माँ दंतेश्वरी का स्वरूप है।
- मण्डप: इसमें अंतराल (अन्तःकक्ष), मुखमण्डप (प्रवेश कक्ष), मुक्तिमण्डप (सभा कक्ष) और नाटमण्डप (नृत्य कक्ष) सम्मिलित हैं।
- गरुड़ स्तम्भ: मन्दिर के प्रवेश द्वार पर एक भव्य स्तम्भ स्थित है।
- भैरव मन्दिर: मूलतः पृथक् यह मन्दिर अब नाटमण्डप के भीतर समाहित है।
उत्सव और सांस्कृतिक महत्व
- बस्तर दशहरा: यहाँ मनाए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण उत्सवों में से एक, जिसमें माँ दंतेश्वरी की प्रतिमा भव्य शोभायात्रा में निकाली जाती है और हज़ारों श्रद्धालु उमड़ते हैं।
- नवरात्रि: दिव्य माता को समर्पित इस नौ रात्रियों के उत्सव में मन्दिर में ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाते हैं और विविध अनुष्ठान सम्पन्न होते हैं।
कैसे पहुँचें
- वायु मार्ग से: निकटतम हवाई अड्डा स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा है, जो रायपुर में लगभग 370 किमी की दूरी पर है।
- रेल मार्ग से: निकटतम रेलवे स्टेशन जगदलपुरहै, जो दंतेवाड़ा से लगभग 80 किमी दूर है।
- सड़क मार्ग से: दंतेवाड़ा सड़क मार्ग से रायपुर और जगदलपुर जैसे प्रमुख नगरों से भली-भाँति जुड़ा है।
