परम्परा से दिव्य माता श्री ललिता त्रिपुर सुंदरी की उपासना 64 उपचारों से की जाती है। आदि परम्पराओं में, सम्पूर्ण अनुष्ठान केवल मानसिक रूप से भी सम्पन्न किया जा सकता था। तांत्रिक परम्परा में वास्तविकता सूक्ष्म आयाम से प्रकट होती है।
यह पारम्परिक 64 उपचारों की पूर्ण सूची है। इन्हें शारीरिक अथवा मानसिक रूप से अर्पित किया जा सकता है:-
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1. Pādyam: माँ के दिव्य विग्रह के चरण धोए जाते हैं।
2. Ābharaṇa Avaropaṇam: पवित्र स्नान से पूर्व, माँ के दिव्य विग्रह के आभूषण उतारकर रखे जाते हैं।
3. Sugandhi Taila Abhyañjanam: माँ के दिव्य विग्रह पर सुगन्धित तेल का लेपन किया जाता है।
4. Majjanaśālā Praveśam: माँ का दिव्य विग्रह स्नान-मण्डप में स्थापित किया जाता है।
5. Majjanaśālā Maṇipīṭhopaveśanam: माँ का दिव्य विग्रह स्नान-मण्डप के मणि-सिंहासन पर विराजमान कराया जाता है।
6. Divyasnānīya Udvartanam: माँ के दिव्य विग्रह का सुगन्धित चूर्णों से उबटन किया जाता है।
7. Uṣṇodakasnānam: माँ के दिव्य विग्रह को उष्ण जल से स्नान कराया जाता है।
8. Kanakakalaśacyuta Sakala Tīrthābhiṣekam: माँ के दिव्य विग्रह को स्वर्ण कलशों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है।
9. Dhautavastra Parimārjanam: माँ के दिव्य विग्रह को कोमल वस्त्र से धीरे से पोंछा जाता है।
10. Aruṇadukūlaparidhānam: माँ के दिव्य विग्रह को लाल रेशमी वस्त्र धारण कराया जाता है।
11. Aruṇakucottarīyam: दिव्य माता को लाल उत्तरीय अर्पित किया जाता है।
12. Ālepa Maṇḍapa Praveśam: माँ का दिव्य विग्रह गन्ध-मण्डप में स्थापित किया जाता है।
13. Ālepa Maṇḍapa Maṇipīṭhopaveśanam: माँ का दिव्य विग्रह गन्ध-मण्डप के मणि-सिंहासन पर विराजमान कराया जाता है।
14. Candanāgaru Kuṅkuma Vilepanaṁ: माँ के दिव्य विग्रह पर चन्दन, अगरु, कुंकुम, मृगमद, कपूर, कस्तूरी और गोरोचन जैसे दिव्य सुगन्धित द्रव्यों का लेपन किया जाता है।
15. Keśabhārasya Kālāgarudhūpam: माँ के दिव्य केश अगरु के धूम्र से सुवासित किए जाते हैं।
16. Mallikā-Mālatī-Jātī-Campaka-Aśoka-Śatapatra-Pūgakuḍmalī-Punnāga-Kahlāra-Mukhya-Sarvartu-Kusumamālā Samarpaṇam: दिव्य माता को ताजे पुष्पों की माला अर्पित की जाती है।
17. Bhūṣaṇa Maṇḍapa Praveśam: माँ का दिव्य विग्रह आभूषण-मण्डप में स्थापित किया जाता है।
18. Bhūṣaṇa Maṇḍapa Maṇipīṭhopaveśanam: माँ का दिव्य विग्रह आभूषण-मण्डप के मणि-सिंहासन पर विराजमान कराया जाता है।
19. Navamaṇi Makuṭam: माँ के दिव्य विग्रह के मस्तक पर नवरत्न मुकुट धारण कराया जाता है।
20. Candraśakalam: माँ के दिव्य विग्रह के नवरत्न पवित्र मुकुट के अग्रभाग के मध्य में चन्द्रकला आभूषण स्थापित किया जाता है।
21. Sīmantasindūram: माँ के दिव्य विग्रह की माँग में सिन्दूर भरा जाता है।
22. Tilakaratnam: माँ के दिव्य विग्रह के ललाट पर तिलक किया जाता है।
23. Kālāñjanam: माँ के दिव्य विग्रह के नेत्रों में काजल लगाया जाता है।
24. Vālīyugalam: दिव्य माता को कर्णफूलों का युगल अर्पित किया जाता है।
25. Maṇikuṇḍalayugalam: दिव्य माता को रत्नजड़ित कुण्डल अर्पित किए जाते हैं।
26. Nāsābharaṇam: दिव्य माता को नथ अर्पित की जाती है।
27. Adharayāvakam: माँ के दिव्य विग्रह के अधरों पर लेप लगाया जाता है।
28. Prathama Bhūṣaṇam: दिव्य माता को मंगलसूत्र अर्पित किया जाता है।
29. Kanaka Cintākam: दिव्य माता को स्वर्ण हार अर्पित किया जाता है।
30. Padakam: दिव्य माता को पदक अर्पित किया जाता है।
31. Mahāpadakam: दिव्य माता को महापदक अर्पित किया जाता है।
32. Muktāvalī: दिव्य माता को मोतियों की माला अर्पित की जाती है।
33. Ekāvalī: दिव्य माता को सत्ताईस मोतियों की माला अर्पित की जाती है।
34. Channavīram: दिव्य माता को छन्नवीर आभूषण अर्पित किए जाते हैं।
35. Keyūrayugala Catuṣṭayam: दिव्य माता को चार बाजूबन्द अर्पित किए जाते हैं।
36. Valayāvalī: दिव्य माता को कंकण अर्पित किए जाते हैं।
37. Ūrmikāvalī: माँ की दिव्य अंगुलियों के लिए मुद्रिकाएँ अर्पित की जाती हैं।
38. Kāñcīdāma: दिव्य माता को कटि-मेखला अर्पित की जाती है।
39. Kaṭisūtram: दिव्य माता को कटिसूत्र अर्पित किया जाता है।
40. Saubhāgyābharaṇam: दिव्य माता को शुभ कटि-आभूषण अर्पित किया जाता है।
41. Pādakaṭakam: माँ के दिव्य चरणों में नूपुर अर्पित किए जाते हैं।
42. Ratnanūpuram: माँ के दिव्य चरणों में रत्नजड़ित नूपुर अर्पित किए जाते हैं।
43. Pādāṅgulīyakam: माँ के दिव्य चरणों में बिछुए अर्पित किए जाते हैं।
44. Pāśam: माँ के दिव्य विग्रह के ऊपरी बाएँ हस्त में पवित्र पाश धारण कराया जाता है।
45. Aṅkuśam: माँ के दिव्य विग्रह के ऊपरी दाएँ हस्त में पवित्र अंकुश धारण कराया जाता है।
46. Puṇḍrekṣu Cāpam: माँ के दिव्य विग्रह के निचले बाएँ हस्त में इक्षु-धनुष धारण कराया जाता है।
47. Puṣpabāṇam: माँ के दिव्य विग्रह के निचले दाएँ हस्त में पुष्प-बाण धारण कराए जाते हैं।
48. Śrīman Māṇikya Pāduke: माँ के दिव्य चरणों में माणिक्य पादुकाएँ अर्पित की जाती हैं।
49. Sva Samāna Veṣābhir Āvaraṇa Devatābhiḥ Saha Mahācakrādhirohaṇam: दिव्य माता की परिचारिकाएँ भी वैसे ही वैभव से सुसज्जित की जाती हैं।
50. Kāmeśvarāṅkaparyaṅka Upaveśanam: माँ का दिव्य विग्रह भगवान कामेश्वर की दिव्य गोद में विराजमान कराया जाता है।
51. Amṛtāsavacaṣakam: दिव्य माता को दिव्य अमृत का चषक अर्पित किया जाता है।
52. Ācamanīyam: दिव्य माता को आचमन का जल अर्पित किया जाता है।
53. Karpūravīṭikā: दिव्य माता को कपूर सहित ताम्बूल अर्पित किया जाता है।
54. Ānandollāsahāsam: माँ के आनन्दमय दिव्य हास्य के दर्शन किए जाते हैं।
55. Maṅgalārtikam: दिव्य माता की मंगल आरती की जाती है।
56. Chatram: दिव्य माता को राजछत्र अर्पित किया जाता है।
57. Cāmaram: दिव्य माता को चामर अर्पित किया जाता है।
58. Darpaṇam: दिव्य माता के दिव्य विग्रह के समक्ष दर्पण दिखाया जाता है।
59. Tālavṛntam: दिव्य माता को ताड़-पत्र का पंखा अर्पित किया जाता है।
60. Gandham: दिव्य माता को पवित्र चन्दन अर्पित किया जाता है।
61. Puṣpam: माँ के दिव्य चरणों में पुष्प अर्पित किए जाते हैं।
62. Dhūpam: दिव्य माता को पवित्र धूप अर्पित की जाती है।
63. Dīpam: दिव्य माता को पवित्र दीप अर्पित किया जाता है।
64. Naivedyam: दिव्य आशीर्वाद की कामना से, दिव्य माता को पवित्र नैवेद्य अर्पित किया जाता है।
आदि परम्पराओं में, सम्पूर्ण अनुष्ठान केवल “चावल” और “दीप” से भी सम्पन्न किया जा सकता था, और कुछ में केवल मानसिक रूप से। तांत्रिक परम्परा में वास्तविकता सूक्ष्म आयाम से प्रकट होती है। और जैसे “महायाग” मानसिक रूप से सम्पन्न किया जाता है, वैसे ही दीक्षित होने पर, शारीरिक क्रियाओं के होते हुए भी, सभी उपचार अन्ततः मानसिक ही होते हैं।
